Diwali 2024: Date, Importance और Celebration
Diwali, जिसे "Festival of Lights" के नाम से जाना जाता है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस साल Diwali 1 November 2024 को मनाई जाएगी। यह त्योहार रोशनी की अंधकार पर जीत और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। इसे पूरे भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
Diwali 2024 Date
- Dhanteras: 28 October 2024 (Monday)
- Naraka Chaturdashi: 29 October 2024 (Tuesday)
- Diwali (Lakshmi Puja): 1 November 2024 (Friday)
- Govardhan Puja: 2 November 2024 (Saturday)
- Bhai Dooj: 3 November 2024 (Sunday)

Significance of Diwali
Diwali भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने का उत्सव है। लोग इस अवसर को दीप जलाकर और पटाखे जलाकर मनाते हैं। इसके अलावा, यह लक्ष्मी पूजा का पर्व भी है, जिसमें धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
Diwali कैसे Celebrate करें?
- House Cleaning और Decoration: Diwali से पहले घरों की साफ-सफाई की जाती है। लोग अपने घरों को रंगोली, फूलों और दीपों से सजाते हैं।
- Lakshmi Puja: Diwali के मुख्य दिन शाम के समय लक्ष्मी पूजा की जाती है ताकि समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके।
- Lighting Diyas: घर के चारों ओर दीप जलाना एक परंपरा है ताकि अंधकार दूर हो।
- Gift Exchange: परिवार और दोस्तों के साथ मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
- Bursting Firecrackers: बहुत से लोग पटाखे जलाते हैं, लेकिन अब पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ इको-फ्रेंडली Diwali का महत्व बढ़ रहा है।
Eco-Friendly Diwali का महत्त्व
जैसे-जैसे प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, हमें इको-फ्रेंडली Diwali का समर्थन करना चाहिए। इसका मतलब है कि ऐसे पटाखों से बचें जो शोर और वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं। इसके बजाय, दीप जलाने, रंगोली बनाने और प्रियजनों के साथ त्योहार मनाने पर ध्यान दें।
Chhath Puja 2024: Date, Rituals और Importance
Chhath Puja हिंदू धर्म का एक और महत्वपूर्ण त्योहार है, विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में। यह सूर्य देव और छठी मैया की पूजा के लिए समर्पित है। Chhath Puja 2024 6 November 2024 से 9 November 2024 तक मनाई जाएगी।
Chhath Puja 2024 Date
- Nahai Khai: 6 November 2024 (Wednesday)
- Kharna: 7 November 2024 (Thursday)
- Sandhya Arghya: 8 November 2024 (Friday)
- Usha Arghya: 9 November 2024 (Saturday)

Significance of Chhath Puja
Chhath Puja सबसे पुराने वैदिक त्योहारों में से एक है, जिसमें भक्त सूर्य देव का धन्यवाद करते हैं क्योंकि सूर्य धरती पर जीवन के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव को प्रार्थना करने से परिवार में स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशी आती है।
Chhath Puja के Rituals
- Nahai Khai: पहले दिन भक्त पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और व्रत की शुरुआत करते हैं।
- Kharna: दूसरे दिन भक्त बिना अन्न-जल ग्रहण किए कठोर उपवास रखते हैं। शाम को, चावल और गुड़ से बने प्रसाद के साथ उपवास तोड़ा जाता है।
- Sandhya Arghya: तीसरे दिन भक्त डूबते हुए सूर्य को जल में खड़े होकर अर्घ्य (प्रसाद) चढ़ाते हैं।
- Usha Arghya: चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य चढ़ाया जाता है और इस तरह Chhath Puja का समापन होता है।
Chhath Puja कैसे Celebrate करें?
Chhath Puja एक सामुदायिक त्योहार है, जहाँ लोग नदियों या जलाशयों के किनारे इकट्ठा होते हैं। ज्यादातर महिलाएं कड़ा उपवास करती हैं और सूर्य देव को प्रार्थना अर्पित करती हैं।
- Prasad की तैयारी: प्रसाद, जैसे थेकुआ, फल, और अन्य विशेष व्यंजन, पूजा के दौरान चढ़ाए जाते हैं।
- Fasting: भक्त तीन दिनों तक कठोर उपवास रखते हैं और सूर्य देव को समर्पित प्रार्थनाएँ करते हैं।
- Arghya Offering: सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना Chhath Puja के Rituals का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- Bhajans और Songs: पूजा के दौरान पारंपरिक लोक गीत और भजन गाए जाते हैं, जो एक आध्यात्मिक वातावरण बनाते हैं।
Chhath Puja का महत्व
Chhath Puja का महत्व प्राकृतिक तत्वों के प्रति भक्ति में निहित है। यह जीवन में सूर्य की भूमिका को रेखांकित करता है और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है। इस पूजा के दौरान कठोर उपवास और अनुशासन से भक्ति और आत्म-शुद्धिकरण का प्रतीक है।
निष्कर्ष
Diwali और Chhath Puja, दोनों ही हिंदू परंपराओं में गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता रखते हैं। जहां Diwali अच्छाई की बुराई पर जीत का उत्सव है, वहीं Chhath Puja प्राकृतिक तत्वों, विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा के लिए समर्पित है। 2024 में ये त्योहार उसी उत्साह और भक्ति के साथ मनाए जाएंगे, जो सभी के लिए खुशी, समृद्धि और सुख लेकर आएंगे।
इन त्योहारों को इको-फ्रेंडली तरीके से मनाकर, हम न केवल परंपरा का सम्मान करते हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान देते हैं।