Rabindranath Tagore birthday 2023 : रवींद्रनाथ टैगोर क्यों प्रसिद्ध है?
Published Balindra Kumar |
Date: 2023-05-08
रविंद्र की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन सी है? - रविंद्र नाथ टैगोर की कई प्रसिद्ध रचनाएं हैं, लेकिन उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना गीतांजलि है। यह उनकी सबसे लोकप्रिय और अधिक जानी जानी कविता-संग्रह है जिसमें उन्होंने भावनात्मक विचारों, धर्म, प्रकृति, प्रेम, देशभक्ति और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों को व्यक्त किया है।

रवींद्रनाथ टैगोर क्यों प्रसिद्ध है? रवींद्रनाथ टैगोर सर्वश्रेष्ठ क्यों हैं?
रवींद्रनाथ टैगोर भारत के प्रसिद्ध कवि, लेखक, नाटककार, शिक्षक, फिलॉसफर और सामाजिक सुधारक थे। वे नोबेल पुरस्कार विजेता थे और भारतीय साहित्य के इतिहास में उन्हें सबसे महान लेखकों में से एक माना जाता है।
टैगोर का साहित्य विस्तृत है और उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, गीत, उपन्यास, जीवनी और निबंध लिखे। उनकी कविताओं के विषय अन्याय, स्वतंत्रता, धर्म, प्रकृति और प्रेम शामिल हैं। उन्होंने एक बहुत लोकप्रिय गीत जन गण मन लिखा जो भारत का राष्ट्रगान है।
उनके लेखन में संस्कृति, समाज, धर्म और मानवता के मुद्दों को उठाने का फलस्वरूप उन्हें विशिष्ट बनाता है। उन्होंने संस्कृति के महत्व को बढ़ावा दिया और विश्व के भिन्न-भिन्न भागों की संस्कृतियों को एक साथ लाने का प्रयास किया। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा के महत्व को भी उठाया और एक नई शिक्षा विधि विकसित की जो न केवल बुद्धिमत्ता विकसित करती है,
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रवींद्रनाथ टैगोर का नारा क्या था?
रवींद्रनाथ टैगोर का नारा है जन-गण-मन। इस नारे का अर्थ होता है जनता, गान और मन और इसे उन्होंने भारत के राष्ट्रगान जन-गण-मन के रूप में दिया था। यह नारा उनके द्वारा स्थापित की गई विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, जो एक एकीकृत भारत के लिए एकता, समानता और बंधुत्व को बढ़ावा देती है।
रवींद्रनाथ को नोबेल पुरस्कार क्यों मिला?
रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उन्हें नोबेल साहित्य पुरस्कार दिया गया था उनकी अंग्रेजी और बंगाली भाषाओं में लिखी गई कविताओं, नाटकों, निबंधों, उपन्यासों और गीतों के लिए। टैगोर एक उत्कृष्ट साहित्यकार, कवि, लेखक, संगीतकार, दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उन्होंने भारत की संस्कृति और धर्म को पूरी दुनिया में प्रस्तुत किया था और इनमें उनके लेखन का एक महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी रचनाओं में प्रेम, आत्म-उन्नयन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और समाज सुधार के महत्वपूर्ण संदेश होते हैं जो उन्होंने बड़े सौम्यता और संवेदनशीलता से पेश किए थे।
हाँ, रवींद्रनाथ टैगोर ने 1883 में मृणालिनी देवी से विवाह किया था। मृणालिनी देवी उनके पिता द्वारा चुनी गई थी और उन्होंने अपनी शादी एक बड़ी समाजसेवी के साथ करी थी जो बाद में भारतीय महिला मोर्चा की संस्था की स्थापना की। टैगोर और मृणालिनी देवी के बीच संबंध बड़े प्रेम से थे और उनकी शादी बड़े समाजसेवी एवं कवि रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी में एक महत्वपूर्ण घटना है।
रवींद्रनाथ टैगोर को बंगाल का बार्ड इसलिए कहा जाता था क्योंकि वे बंगाल के समस्त साहित्यकारों के लिए एक आदर्श बने थे। वे बंगाली साहित्य, संस्कृति और भारतीय धर्म के प्रति बहुत गहरी रुचि रखते थे। उनके लेखन में बंगाली संस्कृति के विविध पहलुओं का वर्णन था जो उनके समय में बंगाल में प्रचलित थे। उन्होंने बंगाली साहित्य को उन्नत करने में बहुत योगदान दिया और उनके कई उपन्यास, कविताएँ और नाटक बंगाली साहित्य के क्षेत्र में आदर्श माने जाते हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं में कुछ बहुत ही प्रसिद्ध हैं। उनकी कविताओं में स्वदेश और प्रकृति के प्रति गहरा अनुभव है। यहाँ कुछ उनकी प्रसिद्ध कविताओं का उल्लेख किया गया है:गीतांजलि, बलि अठवा रसयात्री, विसर्जन, जन्माष्टमी, अमल की खुशबू, सेप्टेम्बर एकादशी, शेष संदेश, बजी, इनके अलावा भी रवींद्रनाथ टैगोर की कई अन्य कविताएँ हैं जो उनके साहित्य के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
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